आरती एवं स्तुतिआरतीलेख 
आरती जय श्री माँ त्रिपुरे
आरती जय श्री माँ त्रिपुरे
१० अक्टूबर २०२६1 मिनट पढ़ने में

ॐ जय श्री माँ त्रिपुरे, देवी जय श्री माँ त्रिपुरे ।
प्रसीद मामिह सततं–2, कुरु विघ्नं दूरे ।। ॐ जय श्री माँ त्रिपुरे.....।
ॐ त्रिकोण गर्वित बिन्दु, स्तदुपरी षट्कोणम् ।
अष्टोपद्मा काली–2, वर्तुल में एकैकम् । ॐ जय श्री माँ त्रिपुरे.....।
चतुराख्यं त्रय युग्मं, द्वारे श्चतुराख्यं, देवी श्चतुराख्यं ।
त्रय योनि त्रय बीजम्–2, बालास्तव चरितम् । ॐ जय श्री माँ त्रिपुरे.....।
शक्ति कामं युग्मं वाग्भव स्तव आद्यम् देवी वाग्भव स्तव आद्यम् ।
मध्ये पंचापूजा, पंचा शशि वर्णम् । ॐ जय श्री माँ त्रिपुरे.....।
षोढ़ष वर्णा षोढ़ा माँ पीताम्बर बगला, देवी पीताम्बर बगला ।
प्रोढ़ाकाली तारा माँ–2 मध्ये तवं कमला । ॐ जय श्री माँ त्रिपुरे.....।
भैरवी छिन्ना धूमा, मातंगी भुवना, देवी मातंगी भुवना ।
दशमहाविद्या बाला–2, देवी अन्नपूर्णा ।। ॐ जय श्री माँ त्रिपुरे.....।
ध्यान् आरती समये, हृदये अपि कृत्वा देवी हृदये अपि कृत्वा ।
नर नारी वां पठते–2 सर्व सुखम् लभते । ॐ जय श्री माँ त्रिपुरे.....।
जय श्री माँ त्रिपुरे, देवी जय श्री माँ त्रिपुरे ।
प्रसीद मामिह सततं–2, कुरु विघ्नं दूरे ।। ॐ जय श्री माँ त्रिपुरे.....।
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**कर्पूर मंत्र**
हेतुः समस्त जगतां त्रिगुणापि दोषै, र्न ज्ञायसे हरिहरादिभिरप्यपारा ।
सर्वाश्रयाखिलमिदं जगदंशभूता मव्याकृताहिरपरमां प्रकृतिस्त्वमाद्या ।।
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कर्पूर गौरं करूणावतारं संसार सारं भुजगेन्द्र हारम् ।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे, भवं भवानी सहितं नमामि ।।
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मंगलं भगवान् विष्णुः मंगलं गरूड़ध्वज ।
मंगलं पुण्डरिकाक्षो, मंगलायतनोहरिः ।।
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समय बहाकर ले जाता है नाम और निशान, कोई 'हम' में रह जाता है और कोई 'अहम' में ।
॥ जय श्री माँ त्रिपुरा सुंदरी ॥

